'बर्थडे बॉय' हेड कांस्टेबल सस्पेंड!
स्वर्णिम भारत NEWS इंदौर की फिजाओं में 'परदेशीपुरा' थाना आजकल न्याय के लिए नहीं, बल्कि वर्दी की रुसवाई के लिए गूँज रहा है।
अभी सब-इंस्पेक्टर की 'बंदूकिया लापरवाही' की स्याही सूखी भी नहीं थी कि महकमे के एक और 'नुमाइंदे' ने वर्दी पर कालिख पोत दी।
हेड कांस्टेबल जीतू सरदार, जिनकी जिम्मेदारी सलाखों के पीछे रहने वालों पर नज़र रखना था, वही उन 'खूंखार' चेहरों के साथ केक काटते और ठहाके लगाते नजर आए। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस 'बर्थडे बैश' के वीडियो ने पुलिस कमिश्नरेट की साख को सरेआम नीलाम कर दिया।
जैसे ही यह 'नापाक' वीडियो आला अफसरों की दहलीज तक पहुँचा, वैसे ही 'सरदार' की हेकड़ी हवा हो गई। जांच में खुलासा हुआ कि यह महज एक पार्टी नहीं, बल्कि बदमाशों और ख़ाकी के बीच पनप रहे 'अपराधिक गठजोड़' का प्रमाण था। नतीजतन, जीतू सरदार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर लाइन हाजिर कर दिया गया है।
1. वर्दी का पतन: जिस वर्दी को देखकर अपराधियों में खौफ होना चाहिए, उसी वर्दी को बदमाशों के जश्न का हिस्सा बनाकर पुलिस के इकबाल को खत्म किया गया है।
2. कानून का 'सरेंडर': अपराधियों के साथ पुलिस की ऐसी 'जुगलबंदी' आम जनता के मन में असुरक्षा पैदा करती है। क्या अब शहर की सुरक्षा उन हाथों में है जो गुंडों के साथ केक बांट रहे हैं?
3. सिस्टम का खोखलापन: परदेशीपुरा थाने में एक के बाद एक कांड होना यह दर्शाता है कि यहाँ प्रशासनिक पकड़ शून्य हो चुकी है और 'अनुशासन' सिर्फ कागजों तक सीमित है।
4. मुखबिरी का खतरा: जब पुलिसकर्मी ही बदमाशों के यार बन जाएंगे, तो पुलिस की गुप्त सूचनाएं और कार्रवाई की भनक अपराधियों तक पहुंचना तय है, जिससे क्राइम कंट्रोल नामुमकिन हो जाएगा।
"अपराधियों से यारी, खाकी की सबसे बड़ी गद्दारी है।"



0 टिप्पणियाँ